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नर हो या नारी नशा पड़ेगा भारी

नर हो या नारी नशा पड़ेगा भारी जहां एक समय पुरुषों में ही नशे की लत अधिक थी, वहीं पिछले कुछ सालों में महिलाओं में भी नशे का चलन बढ़ा है। लेकिन दोनों ही शरीरों पर पड़ने वाले प्रभावों में काफ़ी भिन्नता है। जानिए, इस लेख के माध्यम से। Credit :- डॉ. गौरव जैन, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, धर्मशिला नारायण सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में नशे की लत एक गम्भीर समस्या बन चुकी है। कोई शराब का नशा करता है तो कोई तम्बाकू, मादक द्रव्य, चरस, गांजा, अफ़ीम का नशा कर अपने पूरे शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है।  नशे को लेकर किए गए एक शोध में यह बात पता चली कि तक़रीबन 7.13 करोड़ भारतीय तरह-तरह के नशों की गम्भीर लत से जूझ रहे हैं। नशे की लत से पुरुषों एवं महिलाओं में कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं जिनमें किडनी की बीमारी, हृदय से सम्बंधित समस्या, लिवर से जुड़ी समस्या के साथ कैंसर होने की आशंका भी बनी रहती है। नशा करने वाले पुरुषों एवं महिलाओं को अंत में भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पुरुषों में होने वाले नुक़सान - फेफड़ों को क्...
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घर से दूरी कभी होती है ज़रूरी

घर से दूरी कभी होती है ज़रूरी बच्चा जब तक घर में रहता है वह कम्फर्ट जोन में होता है। हर तनाव, हर निबाह से आजाद। न ख़ास दिनचर्या का दबाव, न कोई जवाबदेही । हर अभिभावक उसे अनुशासित जीवन जीने के लिए प्रेरित करना चाहता है। इसीलिए हर बच्चे का एक बार किसी हॉस्टल में या स्वतंत्र रूप से रहना बहुत जरूरी है। इससे बच्चे में न सिर्फ मानसिक बल्कि सामाजिक समझ भी विकसित होती है। जब बड़े होगे, तब जानोगे बच्चों की लापरवाही भरी जीवनशैली देखकर अक्सर अभिभावक यह कहते हैं। बच्चे हंसकर टाल देते हैं। वैसे कहना यह चाहिए कि जब अपने दम पर रहोगे, तब जानोगे। यह सिखाने के लिए जरूरी है कि बच्चा स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई के कुछ साल छात्रावास या स्वतंत्र रूप से रहकर गुजारे। जिंदगी 360 डिग्री पर बदल जाती है, जब वह किसी दूसरे शहर में पढ़ने के लिए जाता है। जहां उसके लिए सबकुछ नया होता है। खुद से दोस्त बनाना हो या सीमित पैसों में खर्च चलाना, उसे सबकुछ सीखना और करना होता है। एक तरफ घर छोड़कर, किसी बड़े शहर में रहना, अच्छे कॉलेज या स्कूल में पढ़ने के लिहाज से जरूरी है वहीं बच्चे के व्यक्तित्व विकास के लिए भी, क्योंक...

हीमोग्लोबिन कम या अधिक तो नहीं?

हीमोग्लोबिन कम या अधिक तो नहीं? हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो तो भी दिक्कत और अधिक हो तब भी समस्या। यह आपकी सेहत के लिहाज़ से तो परेशानियां खड़ी करेगा ही, साथ ही जब किसी रोगी को रक्त की आवश्यकता होगी, तब भी आप सहायता नहीं कर सकेंगे। जानिए हीमोग्लोबिन के बारे में वह सबकुछ, जिससे इसका स्तर संतुलित रखा जा सके। Credit :- डॉ. यश जवेरी निदेशक, सीसीएम व इमरजेंसी मेडिसिन, रीजेंसी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ आधी रात को आरुषि दुर्घटना का शिकार हुई थी, आंतरिक रक्तस्राव काफी हो चुका था। उसे रक्त की तत्काल जरूरत थी। उसी की सहेलियों में तीन का ब्लड ग्रुप उससे मिलता हुआ ए पॉजिटिव निकला। मौके पर पहुंचने के बावजूद उसे कोई रक्त नहीं दे सकी। जांचने पर तीनों का हीमोग्लोबिन कम निकला। आरुषि अब इस दुनिया में नहीं है। हीमोग्लोबिन स्तर के कम होने का अर्थ जहां स्वयं के अस्वस्थ होने का तो संकेत देता ही है, साथ ही किसी अन्य की मदद के लिए भी आपको अनुपलब्ध बता देता है। 26 वर्षीय राकेश को लगता था कि वह पूरी तरह स्वस्थ है। शरीर से अधिक पसीना बहने को वह सामान्य मानता था। उसका हीमोग्लोबिन अधिक है, यह बात उसे तब जाकर पता...

पहले जांचें तब ही ऋण लें

पहले जांचें तब ही ऋण लें आजकल वाणिज्यिक बैंकों को दरकिनार करके लुभावने प्रस्तावों के लालच में आकर सहकारी बैंक व ऑनलाइन एप्स से ऋण लेना प्रचलन में है। लेकिन इन सुविधाओं के इस्तेमाल से पूर्व कुछ बातों को जानना बहुत ज़रूरी है। Credit :- हरीश शर्मा, वित्त सलाहकार बैंक हमारी व्यापार या निजी जरूरतों जैसे घर, कार, इलेक्ट्रानिक सामान आदि के लिए ऋण प्रदान करते हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं कि बिना बैंकिंग व्यवस्था के देश की अर्थव्यवस्था चलना आसान नहीं है। लोग विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऋण लेते है। इन दिनों बड़े मुख्य बैंक के अलावा छोटे सहकारी बैंक और ऑनलाइन लोन एप्स के माध्यम से भी ऋण लेना सामान्य हो चुका है। हालांकि सहकारी बैंक और निजी लोन एप से ऋण लेना सामान्य बैंक की तुलना में नुकसानदायक साबित हो सकता है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर / सिबिल स्कोर अच्छा है तो वाणिज्यिक बैंक से ऋण लेना ही श्रेयस्कर होगा। यदि परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि सहकारी बैंक से ऋण लेना ही है, तो इन बातों पर एकबार अवश्य ध्यान दें। * कम अवधि से असुविधा ज्यादातर ऋण कम अवधि में ही चुकाना पड़ता है, इससे उधार लेने वाल...

फोन फेंको इनाम जीतो

फोन फेंकोइनाम जीतो मोबाइल फोन आज ऐसी अज़ीज़ निधि बन चुका है कि इसका टूटना या खो जाना तो दूर, आसपास दिखाई न देना ही परेशानी का सबब बन जाता है। लेकिन एक खेल ऐसा भी है जिसमें फोन को फेंकना आपको इनाम दिलवा सकता है। फिनलैंड  वही देश है जहां पर मोबाइल दुनिया की पूर्व दिग्गज कम्पनी नोकिया का हेडक्वार्टर मौजूद है। इसी फिनलैंड में वर्ष 2000 में एक अनोखे खेल की शुरुआत हुई जिसने देखते ही देखते अंतरराष्ट्रीय रूप ले लिया। खेल है 'मोबाइल फोन फेंको' प्रतियोगिता । फिनलैंड के सेवनलिन्ना शहर में प्रतिवर्ष इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है और कई देशों से प्रतिभागी इसमें हिस्सा लेने के लिए यहां पहुंचते हैं। खेल बहुत आसान है-  जो जितनी दूर तक मोबाइल फेंकेगा वही विजेता होगा। निर्णायक मंडल द्वारा अधिकतम दूरी और फेंकने की तकनीक के आधार पर विजेता का चयन किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि पुरस्कार के रूप में भी विजेता को मोबाइल ही दिया जाता है। चार श्रेणियों में स्पर्धा ऐसा भी नहीं है कि प्रतिभागी को सिर्फ़ मोबाइल ही फेंकना है तो किसी भी तरह फेंका जा सकता है। इच्छुक प्रतिभागी इन चार श्रेणियों में इस...

पहलगाम: कल्पना से परे हैं यहां के प्राकृतिक दृश्य

पहलगाम: कल्पना से परे हैं यहां के प्राकृतिक दृश्य credit : - नीरज मुसाफ़िर जाने-माने पहलगाम वैसे तो अमरनाथ यात्रा का बेसकैंप होने के कारण ज्यादा प्रसिद्ध है, लेकिन यदि आप छुट्टियां मनाने यहां जाना चाहते हैं, तो भी यह एक आदर्श स्थान है। समुद्र तल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां मौसम हमेशा ठंडा बना रहता है। यहां आप शहर की भीड़ से दूर प्रकृति के बीच होते हैं। आप चाहें तो लिहर नदी के किनारे बैठे-बैठे अपना पूरा दिन गुजार सकते हैं या चाहें तो राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग जैसे साहसिक कार्य भी कर सकते हैं। पहलगाम श्रीनगर से लगभग 100 किमी दूर है और रास्ता अनंतनाग होते हुए जाता है। अनंतनाग से पहलगाम तक लिद्दर नदी के साथ- साथ जाते हैं। लिद्दर नदी शेषनाग झील से निकलती है और चंदनवाड़ी, पहलगाम होते हुए अनंतनाग के पास झेलम नदी में मिल जाती है। इसी लिएर नदी में राफ्टिंग होती है, जो चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से होकर जाती है। अगर आप पहलगाम जा रहे हैं, तो कम से कम दो दिन तो रुकना ही चाहिए। पहला दिन सफर की थकान उतारने के लिए और दूसरा दिन घूमने के लिए। पहलगाम के आसपास एक ...

आप भी तोड़कर खाते हैं दवाई ?

आप भी तोड़कर खाते हैं दवाई ? Credit : - ( सेहत ) डॉ. अजय नायर, कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन, नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल दवाई बानी कि किसी भी टैबलेट को तोड़कर खाने की आदत लगभग हम सभी में है। लेकिन इससे होने वाले दुष्परिणामों के बारे में भी जान लें तो बेहतर होगा। कई बार हम कुछ दवाइयों को तोड़कर खा लेते हैं। दवाओं का डोज़ कम करने के लिए या फिर बाजार में समान पोटेंस की दवा न मिलने पर ज्यादा एमजी की गोली को आधा करके खा लेते हैं। यदि डॉक्टर ने 250 एमजी की दवा खाने के लिए कही है, लेकिन मिलती 500 एमजी की है तो इसी को आधा करके खा लेते हैं। परंतु हर दवाई को तोड़कर खाना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि कौन-सी दवाई दोड़कर खानी चाहिए और कौन-सी नहीं। इन अक्षरों से समझें दवाओं के पीछे काफी कुछ लिखा हुआ होता है। परंतु उसमें कुछ ऐसे अक्षर भी होते हैं जिनके तात्पर्य यह होते हैं कि आपको उस गोली को सिर्फ़ निगलना है, न कि आधा करके खाना है। जैसे कि..... कुछ दवाइयों पर SIR लिखा होता है जिसका मतलब है सस्टेन रिलीज, कुछ पर CR लिखा होता है जिसका मतलब है कंट्रोल रिलीज और कुछ ...